Tuesday, 18 October 2016

विश्वास






जब मैं सब्जी खरीदने गया तो दुकानदार का छोटा बच्चा अपनी माँ से साइकिल खरीदने की हठ कर रहा था और उसकी माँ उसे विभिन्न प्रकार से बहलाने का प्रयास कर रही थी । अंत में बच्चा पास में खडी मेरी साइकिल पर चढने लगा । खरीदारी करने के बाद जब मैंने साइकिल निकालनी चाही, तो बच्चा हटने के लिए तैयार न हुआ । मैंने बडे प्यार से कहा -
-- चलो, तुम्हें अपने साथ ले चलूँ ।
-- चलो । - बच्चे ने उत्तर दिया ।
-- लेकिन वह बहुत दूर है ।
-- कोई बात नहीं, चलो ।
-- अभी ले जाएँगे, तो वापस नहीं छोडेंगे । रात भर रुकना पडेगा, सुबह ही आ पाओगे ।
-- कोई बात नहीं, रुक लूँगा ।
-- लेकिन वहाँ खाने को कुछ नहीं मिलेगा ।
-- मैंने दिन में खा लिया था ।
लडके का हठ और दृढनिश्चय देखकर मैं दंग रह गया । आखिर में मैंने उससे कहा -
-- ऐसे ही किसी की भी साइकिल पर बैठ जाओगे, कोई चलने को कहेगा, तो चल दोगे ? यह तो मैं हूँ, लेकिन अगर कोई उठा ले गया तो ?
लडका चुप रहा, फिर अपनी माँ के द्वारा भी वही बात कहे जाने पर साइकिल से उतर गया ।
लौटते समय मैं सोच रहा था, कितना सहज और विश्वासी मन होता है बच्चों का । व्यक्ति बाल्यकाल में अपरिचित पर भी विश्वास कर लेता है, और वयस्क होने पर परिचित तथा मित्र पर भी संशय करता है ।






photo credit: Nithi clicks A smile is happiness you'll find right under your nose. via photopin (license)


6 comments:

  1. amit ji ap IIT bombay posting le lijiye , aap itna achcha likhte hai ki ho sakta hai aap kisi bollywood film ka hissa ban jaye. aapke lekh or shabdo ka chayan kisi sahityakar ki tarah hai

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thanks Rupesh.

      I am moving to my new blog. This post and your comments are located here

      Delete
  2. Such innocence in kids' words, I hope he does get the cycle one day (soon).

    ReplyDelete
    Replies
    1. Sure :-) Usually parents allow kids only when they have reached 5th standard. One child told me this :-)

      I am moving to my new blog. This post is located here

      Delete
  3. "व्यक्ति बाल्यकाल में अपरिचित पर भी विश्वास कर लेता है, और वयस्क होने पर परिचित तथा मित्र पर भी संशय करता है।"- Lovely insight... Yet in this Kalyug., even the known cannot be trusted...

    ReplyDelete
    Replies
    1. Yes Sir. Sometimes strangers appear to be more trustworthy.

      I am moving my blog to personal domain. This article is located here

      Delete